जाँचें और सहायक देखभाल

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जाँचें और सहायक देखभाल

पुरुषों के लिए

जाँच का नाम
यह क्यों किया जाता है
सीमेन एनालिसिस (वीर्य जाँच)
सीमेन एनालिसिस पुरुष इनफर्टिलिटी की जाँच के लिए एक बुनियादी और ज़रूरी टेस्ट है। इससे शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता (मूवमेंट) और बनावट (आकार) की जाँच होती है। वीर्य के असामान्य नतीजे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना कम कर सकते हैं।
हार्मोन टेस्ट (टेस्टोस्टेरोन, FSH, LH)
शुक्राणुओं की संख्या कम होने पर किया जाता है, यह देखने के लिए कि कहीं समस्या हार्मोन की वजह से तो नहीं
स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड
स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड (केवल ज़रूरत होने पर) अंडकोष में किसी सूजन या रुकावट की जाँच के लिए
शुरुआती जाँचें

महिलाओं के लिए

जाँच का नाम
यह क्यों किया जाता है
ओव्यूलेशन टेस्ट (प्रोजेस्टेरोन ब्लड टेस्ट)
ओव्यूलेशन टेस्ट (प्रोजेस्टेरोन ब्लड टेस्ट) यह जाँचने के लिए कि क्या हर महीने आपका अंडाणु निकल रहा है (ओव्यूलेशन हो रहा है)
AMH टेस्ट
यह जाँचने के लिए कि आपके पास कितने अंडाणु हैं (ओवेरियन रिज़र्व) • ज़्यादा AMH: अच्छा रिज़र्व; कम AMH: घटा हुआ रिज़र्व। • यह अनुमान लगाने में मदद करता है कि महिला IVF जैसे फर्टिलिटी इलाज पर कैसी प्रतिक्रिया देगी। • उम्र के साथ AMH स्वाभाविक रूप से घटता है और मेनोपॉज़ के पास बहुत कम हो जाता है।
FSH, LH (दिन 2–5 का ब्लड टेस्ट)
आपके मासिक चक्र को नियंत्रित करने वाले हार्मोन के स्तर की जाँच के लिए
थायरॉइड टेस्ट (T3, T4, TSH)
पीरियड्स और फर्टिलिटी पर असर डालने वाली थायरॉइड की समस्याओं को जाँचने के लिए
प्रोलैक्टिन टेस्ट
यह जाँचने के लिए कि कहीं इसका बढ़ा हुआ स्तर ओव्यूलेशन को तो नहीं रोक रहा
पेल्विक अल्ट्रासाउंड
यह देखने के लिए कि आपका गर्भाशय और अंडाशय स्वस्थ दिखते हैं या नहीं (सिस्ट, फाइब्रॉइड आदि)
HSG (गर्भाशय और ट्यूब का एक्स-रे)
यह जाँचने के लिए कि आपकी फैलोपियन ट्यूब खुली हैं (कोई रुकावट नहीं है)
फर्टिलिटी के प्रति जागरूकता

प्राकृतिक योजना

संबंध बनाने के लिए सबसे अच्छा समय चुनें
गर्भधारण की सबसे ज़्यादा संभावना 6 दिनों की फर्टाइल विंडो के दौरान होती है, खासकर ओव्यूलेशन के दिन, यानी जिस दिन अंडाणु निकलता है (≈ 14वाँ दिन)। इस दौरान रोज़ या एक दिन छोड़कर संबंध बनाना सबसे अच्छा है।

ओव्यूलेशन पर नज़र रखें

सेहतमंद आहार लें

महिलाओं के लिए

पुरुषों के लिए

अपना वज़न नियंत्रण में रखें
बहुत कम या बहुत ज़्यादा वज़न फर्टिलिटी को कम करता है। मोटापा महिलाओं में ओव्यूलेशन और अंडाणु की गुणवत्ता पर असर डालता है और पुरुषों में शुक्राणु की गुणवत्ता घटाता है। बॉडी मास इंडेक्स (BMI) एक पैमाना है, जिससे पता चलता है कि व्यक्ति का वज़न कम है, सामान्य है, ज़्यादा है या मोटापे की श्रेणी में है। इसे BMI कैलकुलेटर से आसानी से जाना जा सकता है। आदर्श BMI 18.5 से 25 है।

नियमित व्यायाम करें

लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करें, लेकिन सावधानी से

सहायक प्रजनन तकनीकें

IUI, IVF, ICSI – क्या, कब और कैसे

जाँच का नाम
यह क्यों किया जाता है
IUI (इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन)
कृत्रिम गर्भाधान का एक तरीका, जिसमें शुक्राणु को सीधे महिला के गर्भाशय में रखा जाता है कब: पीरियड्स के दूसरे या तीसरे दिन से दवाएँ दी जाती हैं प्रक्रिया: गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए शुक्राणु को सीधे महिला के गर्भाशय में रखा जाता है
IVF (इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन)
एक प्रक्रिया जिसमें निषेचन शरीर के बाहर होता है और भ्रूण को गर्भाशय में रखा जाता है कब: पीरियड्स के दूसरे या तीसरे दिन से हार्मोन के इंजेक्शन दिए जाते हैं प्रक्रिया: इसमें शरीर के बाहर अंडाणु को शुक्राणु से मिलाकर भ्रूण बनाए जाते हैं, और फिर गर्भधारण के लिए उन्हें गर्भाशय में ट्रांसफ़र किया जाता है
ICSI
IVF का एक प्रकार, जिसमें एक शुक्राणु को सीधे अंडाणु के साइटोप्लाज़्म में इंजेक्ट किया जाता है कब: IVF की तरह ही – हार्मोन के इंजेक्शन दूसरे या तीसरे दिन से शुरू होते हैं प्रक्रिया: इसमें गर्भधारण में मदद के लिए एक शुक्राणु को सीधे अंडाणु में इंजेक्ट किया जाता है
उन्नत विकल्प

फ्रीज़िंग, डोनर, सरोगेसी, जेनेटिक टेस्टिंग

  1. थर्ड-पार्टी रिप्रोडक्शन:

 

फर्टिलिटी प्रिज़र्वेशन (फर्टिलिटी सुरक्षित रखना):

इनफर्टिलिटी की समस्या वाली / जोखिम वाली महिलाओं के लिए:

पुरुषों के लिए 

 

शुक्राणु चुनने की उन्नत तकनीकें:

 

अन्य सहायक उपचार: